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VB-G RAM G योजना में बड़ा बदलाव: छत्तीसगढ़ में 318 की जगह अब 375 तरह के काम,संपूर्ण विश्लेषण :

छत्तीसगढ़ में VB-G RAM G के तहत 318 से बढ़कर 375 अनुमेय कार्य हुए। जानिए ₹4,000 करोड़ बजट, ₹3,354.85 करोड़ केंद्रीय आवंटन, 125 दिन रोजगार और ₹300 मजदूरी की पूरी जानकारी।

छत्तीसगढ़ में VB-G RAM G के तहत 375 अनुमेय कार्य और ग्रामीण विकास
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HIGHLIGHTS

5 Key Highlights:

  1. VB-G RAM G में अनुमेय कार्य 318 से बढ़कर 375 हुए।
  2. छत्तीसगढ़ बजट 2026-27 में ₹4,000 करोड़ का प्रावधान।
  3. छत्तीसगढ़ के लिए केंद्र का ₹3,354.85 करोड़ अंतरिम आवंटन।
  4. रोजगार गारंटी 125 दिन और छत्तीसगढ़ में मजदूरी ₹300 प्रतिदिन।
  5. जल संरक्षण, सड़क, स्कूल, SHG, कृषि, पशुपालन और आपदा प्रबंधन को कार्यों में शामिल किया गया।

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रोजगार को केवल मजदूरी तक सीमित रखने के बजाय उसे जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका, कृषि, पशुपालन और आपदा प्रबंधन से जोड़ने की दिशा में VB-G RAM G मिशन का दायरा बढ़ाया गया है। राज्य में इस मिशन के तहत अब 318 की जगह 375 प्रकार के अनुमेय कार्य किए जा सकेंगे। अनुमेय कार्यों के विस्तार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों और बुनियादी सुविधाओं के निर्माण को गति मिलेगी। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में VB-G RAM G के लिए ₹4,000 करोड़ का प्रावधान किया है।

VB-G RAM G क्या है?

VB-G RAM G का पूरा नाम Viksit Bharat–Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) यानी विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) है। केंद्र सरकार के अनुसार VB-G RAM G Act, 2025 के तहत ग्रामीण परिवारों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वैधानिक अकुशल रोजगार की गारंटी का प्रावधान है। यह व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू हुई।

छत्तीसगढ़ के लिए कितना आवंटन?

वहीं राज्य के 2026-27 बजट में VB-G RAM G के लिए ₹4,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। जून 2026 में छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने भी राज्य में VB-G RAM G योजना के प्रारूप को मंजूरी दी थी। योजना के वित्तीय भार में केंद्र और राज्य के बीच 60:40 का अनुपात रखा गया है।

318 से बढ़कर 375 हुए अनुमेय कार्य :

राज्य सरकार के अनुसार, VB-G RAM G के अंतर्गत अनुमेय कार्यों की संख्या 318 से बढ़ाकर 375 कर दी गई है। इन कार्यों को मुख्य रूप से 4 व्यापक श्रेणियों और 30 उप-श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है। इनमें व्यक्तिगत, समूह और सामुदायिक उपयोग की परिसंपत्तियों के साथ मरम्मत एवं रखरखाव से जुड़े कार्य भी शामिल हैं। राज्य सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार विस्तारित सूची में 68 प्रकार के व्यक्तिगत कार्य और 99 प्रकार के मरम्मत एवं रखरखाव संबंधी कार्य शामिल हैं।

चार प्रमुख श्रेणियां

  1. जल सुरक्षा एवं जल संरक्षण
  2. ग्रामीण अधोसंरचना
  3. आजीविका संबंधी अधोसंरचना
  4. चरम मौसम एवं आपदा न्यूनीकरण संबंधी कार्य

1. जल संरक्षण से भूजल पुनर्भरण तक

इस श्रेणी में जल सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी गई है।

इनमें प्रमुख रूप से—

  • चेकडैम
  • गली प्लग
  • नहर एवं बाढ़ नियंत्रण चैनल
  • भूमिगत डाइक
  • तालाबों का पुनर्जीवन
  • परकोलेशन टैंक
  • रिचार्ज पिट एवं रिचार्ज शाफ्ट
  • इंजेक्शन वेल
  • सिंचाई कुएं
  • माइक्रो एवं ड्रिप सिंचाई से जुड़ी संरचनाएं
  • वाटरशेड भूमि का पुनरुद्धार
  • वनीकरण एवं पौधरोपण
  • मृदा-नमी संरक्षण
  • रूफटॉप वर्षाजल संचयन

जैसे कार्य शामिल हैं।

इसका सीधा संबंध भूजल पुनर्भरण, सिंचाई क्षमता, जल संचयन और कृषि उत्पादकता से है।

2. सड़क, स्कूल और पंचायत भवन जैसी ग्रामीण अधोसंरचना :

इस श्रेणी में गांवों की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं।

इसके अंतर्गत ग्रामीण सड़कें, पुलिया, क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाएं, ग्राम संपर्क सुविधाएं, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, सार्वजनिक भवन, ग्रामीण पुस्तकालय और विद्यालय अधोसंरचना जैसे कार्य किए जा सकेंगे।

स्कूलों से जुड़े कार्यों में—

  • शौचालयों की मरम्मत
  • अतिरिक्त कक्ष
  • प्रयोगशालाएं
  • रसोई शेड
  • परिसर की दीवार
  • खेल मैदान

जैसे कार्य शामिल हैं।

इसके अलावा स्वच्छता परिसर, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, अपशिष्ट पृथक्करण केंद्र, सौर प्रकाश व्यवस्था, बायोगैस प्लांट, पार्किंग एवं परिवहन शेड जैसी सामुदायिक सुविधाओं को भी दायरे में शामिल किया गया है।

3. कृषि, पशुपालन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा :

इसमें रोजगार पैदा करने वाली उत्पादक परिसंपत्तियों पर जोर दिया गया है। उदाहरण के तौर पर—

  • प्रशिक्षण एवं कौशल विकास केंद्र
  • स्वयं सहायता समूहों के वर्कशेड
  • ग्रामीण हाट एवं साप्ताहिक बाजार
  • कृषि उपज भंडारण
  • कोल्ड स्टोरेज
  • कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़ी संरचनाएं
  • वर्मी कम्पोस्ट एवं नाडेप इकाइयां
  • डेयरी एवं दुग्ध संग्रहण केंद्र
  • पशु आश्रय
  • मत्स्य पालन अधोसंरचना
  • नर्सरी एवं पौधरोपण
  • सिल्विपास्चर

जैसे कार्य शामिल हैं।

इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि स्थानीय संसाधनों के आधार पर आय के स्थायी अवसर विकसित करना है।

कृषि प्रसंस्करण को भी मिलेगा आधार :

नई कार्य-सूची में कृषि एवं वन उत्पादों के प्रसंस्करण से जुड़ी अधोसंरचना को भी स्थान दिया गया है।

इसमें—

  • मिनी फ्लोर मिल
  • खाद्य प्रसंस्करण
  • तेल प्रसंस्करण
  • एकीकृत कृषि प्रसंस्करण
  • वन उत्पाद प्रसंस्करण
  • हस्तशिल्प प्रसंस्करण
  • जैव-अवक्रमणीय उत्पाद प्रसंस्करण
  • बांस शिल्प

जैसी गतिविधियों के लिए अधोसंरचना विकसित की जा सकती है।

यह व्यवस्था उत्पादन → प्रसंस्करण → मूल्यवर्धन → बाजार की ग्रामीण value chain को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा आधार :

स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्कशेड और समूह-आधारित गतिविधियों की अधोसंरचना को शामिल करने से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों को स्थानीय स्तर पर स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराने की संभावना बढ़ती है। कृषि प्रसंस्करण, वर्मी कम्पोस्ट, नर्सरी, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन और स्थानीय उत्पादों के भंडारण जैसी गतिविधियां ग्रामीण परिवारों की आय के विविध स्रोत विकसित करने में उपयोगी हो सकती हैं।

4. आपदा और चरम मौसम से निपटने वाले कार्य :

चौथी श्रेणी में जलवायु परिवर्तन और चरम मौसमी घटनाओं के प्रभाव को कम करने से जुड़े कार्य रखे गए हैं।

इनमें—

  • चक्रवात आश्रय
  • बाढ़ आश्रय
  • तटबंध
  • गेबियन संरचनाएं
  • रिटेनिंग वॉल
  • बाढ़ सुरक्षा दीवार
  • लेवल बेंच टेरेस
  • अपलैंड बेंच टेरेस
  • स्थिरीकरण तालाब
  • आपदा के बाद ग्रामीण सड़क एवं सामुदायिक परिसंपत्तियों का पुनर्स्थापन
  • विंडब्रेक एवं शेल्टरबेल्ट पौधरोपण
  • वन अग्नि प्रबंधन

जैसे कार्य शामिल हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जलवायु स्थिरता ( climate resilience ) और आकस्मिक स्थिति की तैयारी (disaster preparedness) को स्थानीय विकास कार्यों के साथ जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।

6,671 बालिका शौचालय और 6,524 गांवों में मुक्तिधाम :

राज्य सरकार के ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान के तहत 26 जनवरी 2027 तक ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 6,671 बालिका शौचालय बनाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान की घोषणा अगस्त 2026 में की गई थी। इसी प्रकार राज्य में 6,524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। बंद या डिफंक्ट बोरवेलों में सैंड फिल्टर और रिचार्ज संरचनाएं बनाने की योजना भी जल संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

मजदूरी दर ₹261 से बढ़कर ₹300 प्रतिदिन :

छत्तीसगढ़ में VB-G RAM G के तहत अकुशल श्रमिकों की अधिसूचित मजदूरी दर ₹300 प्रतिदिन है। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ के लिए MGNREGA की दर ₹261 प्रतिदिन थी। केंद्र सरकार की राज्यवार अधिसूचना के अनुसार 1 जुलाई 2026 से VB-G RAM G के तहत छत्तीसगढ़ की मजदूरी दर ₹300 प्रतिदिन निर्धारित की गई है।

रोजगार गारंटी अब 125 दिन :

VB-G RAM G का एक महत्वपूर्ण बदलाव रोजगार की वैधानिक गारंटी से संबंधित है।

नई व्यवस्था में पात्र ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की वैधानिक गारंटी का प्रावधान है, जबकि पूर्व MGNREGA व्यवस्था में यह सीमा 100 दिन थी।

QR Code से 375 कार्यों की जानकारी :

राज्य सरकार के अनुसार, ग्रामीणों तक अनुमेय कार्यों की जानकारी पहुंचाने के लिए QR Code जारी किया गया है। इसके माध्यम से ग्रामीण 375 अनुमेय कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

परीक्षा के लिए याद रखने योग्य तथ्य :

तथ्यजानकारी
योजना का नामViksit Bharat–Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin)
संक्षिप्त नामVB-G RAM G
अधिनियमVB-G RAM G Act, 2025
लागू1 जुलाई 2026
रोजगार गारंटी125 दिन
छत्तीसगढ़ की मजदूरी दर₹300/दिन
पूर्व छत्तीसगढ़ MGNREGA दर₹261/दिन
छत्तीसगढ़ राज्य बजट प्रावधान₹4,000 करोड़
छत्तीसगढ़ के लिए अंतरिम केंद्रीय आवंटन₹3,354.85 करोड़
अनुमेय कार्य375
पहले अनुमेय कार्य318
प्रमुख श्रेणियां4
उप-श्रेणियां30
बालिका शौचालय लक्ष्य6,671
मुक्तिधाम संबंधी लक्ष्य6,524 गांव
वित्तीय साझेदारीकेंद्र : राज्य = 60 : 40

समाचार विश्लेषण :  क्या बदला और इसका महत्व क्या है?

VB-G RAM G में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव इसका “रोज़गार-केंद्रित” ( employment-centric) से “संपत्ति और आजीविका-केंद्रित ढांचा” (asset-and-livelihood-centric framework) की ओर विस्तार है। पहले ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम का प्रमुख फोकस मजदूरी रोजगार उपलब्ध कराना था। नई व्यवस्था में रोजगार के साथ यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि काम से बनने वाली परिसंपत्ति गांव की दीर्घकालीन जरूरत को पूरा करे।

उदाहरण के लिए यदि किसी गांव में जल संकट है, तो रोजगार कार्य को जल संरक्षण संरचना से जोड़ा जा सकता है। यदि कृषि उत्पाद का पर्याप्त मूल्य नहीं मिल रहा है तो भंडारण या प्रसंस्करण से जुड़ी अधोसंरचना विकसित की जा सकती है। इसी प्रकार बाढ़ या वनाग्नि प्रभावित क्षेत्रों में resilience infrastructure तैयार किया जा सकता है। इस दृष्टिकोण से योजना का प्रभाव केवल आय सहायता( income support )तक सीमित न रहकर ग्रामीण पूंजी निर्माण (rural capital formation) तक जा सकता है।

लेकिन सफलता किन बातों पर निर्भर करेगी?

1.स्थानीय जरूरत के अनुसार कार्यों का चयन।
सिर्फ संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा; परिसंपत्तियां गांव की वास्तविक जरूरत के अनुरूप होनी चाहिए।

2.गुणवत्ता और रखरखाव।
तालाब, सड़क, भवन या जल संरचना बनने के बाद उसका रखरखाव भी आवश्यक है।

3.पारदर्शिता।
जियो-टैगिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग, सोशल ऑडिट और सार्वजनिक disclosure का प्रभावी इस्तेमाल महत्वपूर्ण होगा। केंद्र सरकार ने VB-G RAM G में Technology-enabled monitoring और transparency को प्रमुख घटक बनाया है।

4.रोजगार को आजीविका से जोड़ना।
यदि SHG, कृषि प्रसंस्करण, डेयरी, मत्स्य पालन और स्थानीय बाजार जैसी परिसंपत्तियां वास्तव में उपयोग में आती हैं, तभी रोजगार से आगे बढ़कर स्थायी ग्रामीण आय का प्रभाव दिखाई देगा।

आगे कि राह :

छत्तीसगढ़ में VB-G RAM G को प्रभावी बनाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जल बजट, प्राकृतिक संसाधन मानचित्रण और आजीविका योजना को आपस में जोड़ा जा सकता है। विशेष रूप से आदिवासी और वन क्षेत्र वाले जिलों में स्थानीय वन उत्पाद, लघु वनोपज, बांस, कृषि एवं पशुपालन आधारित value chains को प्राथमिकता देकर परिसंपत्ति निर्माण को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ा जा सकता है। इसके साथ प्रत्येक बड़े कार्य की जियो-टैगिंग, सार्वजनिक सूचना, सोशल ऑडिट और उपयोगिता का मूल्यांकन नियमित रूप से किया जाना जरूरी है।

निष्कर्ष :

छत्तीसगढ़ में VB-G RAM G के तहत 318 से बढ़कर 375 अनुमेय कार्य किए जाने का विस्तार ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के दायरे को काफी व्यापक बनाता है। अब जल संरक्षण से लेकर सड़क, स्कूल, पंचायत भवन, कृषि, पशुपालन, SHG, प्रसंस्करण और आपदा प्रबंधन तक अनेक क्षेत्रों में परिसंपत्ति निर्माण को रोजगार से जोड़ा जा सकेगा।

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