करंट अफेयर्स जिला -संभाग सरकारी निर्णय अर्थव्यस्था सामाजिक शिक्षा स्वास्थ्य विज्ञानं एवं प्रौद्योगीकी पर्यावरण साहित्य कला एवं संस्कृति युवा खेल मनोरंजन जागरूकता

---Advertisement---

रायपुर में ‘कहानीकार’ कार्यशाला: जलवायु परिवर्तन, ‘जुगनू’ क्लाइमेट टैब्लॉइड का विमोचन :

रायपुर में 6-7 अक्टूबर को ‘कहानीकार’ कार्यशाला का आयोजन, ‘जुगनू’ हिंदी-अंग्रेजी क्लाइमेट टैब्लॉइड का विमोचन। जानें आयोजन, CARE Project और महत्वपूर्ण तथ्य।

रायपुर में ‘कहानीकार’ कार्यशाला: ‘जुगनू’ क्लाइमेट टैब्लॉइड का विमोचन
---Advertisement---

HIGHLIGHTS

5 मुख्य Highlights
1. रायपुर में 6-7 अक्टूबर 2026 को दो दिवसीय ‘कहानीकार’ कार्यशाला।
2. IISER Pune CARE Project, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, UNICEF और रीजनल साइंस सेंटर का सहयोग।
3. बच्चों के लिए हिंदी-अंग्रेजी क्लाइमेट टैब्लॉइड ‘जुगनू’ का विमोचन।
4. कहानी, कला और स्थानीय अनुभवों के जरिए जलवायु शिक्षा पर जोर।
5. Climate Education, Environmental Health और Experiential Learning पर जोर ।

बच्चों में पर्यावरणीय संवेदनशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा और रचनात्मक सोच विकसित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ में एक महत्वपूर्ण पहल , राजधानी रायपुर में 6 और 7 अक्टूबर 2026 को विद्यालयीन शिक्षकों के लिए दो दिवसीय ‘कहानीकार’ कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों के शासकीय विद्यालयों के शिक्षक भाग ले रहे हैं।

कार्यशाला में कहानी, कला, स्थानीय अनुभव और पर्यावरणीय विषयों को शिक्षण-अधिगम से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसी अवसर पर बच्चों के लिए तैयार किए गए द्विभाषी हिंदी-अंग्रेजी क्लाइमेट टैब्लॉइड ‘जुगनू’ का भी विमोचन किया गया।

‘कहानीकार’ कार्यशाला का उद्देश्य क्या है?

‘कहानीकार’ कार्यशाला की थीम ‘Art as Story, Story as Knowledge, Knowledge as Action’ रखी गई है। इसका मूल विचार यह है कि बच्चों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के बारे में केवल पाठ्यपुस्तक आधारित जानकारी देने के बजाय उन्हें अपने आसपास की प्रकृति को देखने, सवाल पूछने, अनुभव साझा करने और समाधान तलाशने का अवसर दिया जाए।

कार्यशाला का आयोजन IISER Pune के CARE Project, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, UNICEF और छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर के सहयोग से किया जा रहा है। IISER Pune की आधिकारिक जानकारी के अनुसार CARE Project का पूरा नाम Communicating Action and Resilience for Environmental Health in India है। यह परियोजना वैज्ञानिक ज्ञान, स्थानीय अनुभव, समुदाय, शिक्षकों और संस्थानों को जोड़कर पर्यावरणीय स्वास्थ्य एवं जलवायु लचीलेपन को मजबूत करने पर काम करती है।

कहानी के जरिए पर्यावरण शिक्षा पर जोर :

छत्तीसगढ़ साइंस सेंटर के महानिदेशक पी. कवीश्वर ने कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कहानी को बच्चों की सीखने की प्रक्रिया का प्रभावी माध्यम बताया। उनका कहना है कि बच्चों को अपने आसपास की प्रकृति का अवलोकन करने, प्रश्न पूछने और अपने अनुभवों को कहानी के रूप में व्यक्त करने के अवसर मिलने चाहिए। यह दृष्टिकोण पारंपरिक ‘शिक्षक बताए और विद्यार्थी सुने’ मॉडल से आगे बढ़कर अनुभवात्मक एवं गतिविधि आधारित शिक्षा पर जोर देता है।

‘जुगनू’ क्लाइमेट टैब्लॉइड क्यों महत्वपूर्ण है?

कार्यशाला के दौरान बच्चों के लिए तैयार हिंदी-अंग्रेजी ‘जुगनू’ क्लाइमेट टैब्लॉइड का विमोचन किया गया। आयोजकों के अनुसार इसे IISER Pune के CARE Project के एक्शन रिसर्च के माध्यम से विकसित किया गया है और इसे बच्चों तथा विद्यालयीन शिक्षकों की रचनात्मक सामग्री के लिए मंच के रूप में विकसित करने की परिकल्पना है।

‘जुगनू’ का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन को बच्चों के सामने केवल भय या चिंता के विषय के रूप में प्रस्तुत करना नहीं है। इसके बजाय बच्चों को अपने आसपास होने वाले पर्यावरणीय बदलावों को समझने, सवाल उठाने, अपनी बात रखने और सकारात्मक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करना इसका प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।

बच्चों और शिक्षकों के लिए क्या बदलेगा?

इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि इसमें शिक्षक स्वयं भी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं। कार्यशाला में स्थानीय प्रकृति, समुदाय, जलवायु और पर्यावरण से जुड़े अनुभवों को कहानी तथा कला के माध्यम से प्रस्तुत करने की गतिविधियां कराई जा रही हैं।

ऐसे तरीकों से विद्यार्थी:

  • अपने आसपास के पर्यावरण का अवलोकन करना सीख सकते हैं।
  • वैज्ञानिक प्रश्न पूछने की आदत विकसित कर सकते हैं।
  • स्थानीय पर्यावरणीय समस्याओं को पहचान सकते हैं।
  • कहानी, चित्र और अन्य रचनात्मक माध्यमों से अपनी बात रख सकते हैं।
  • जल, जंगल, भूमि और जैव-विविधता के महत्व को समझ सकते हैं।
  • स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

याद रखने योग्य तथ्य:

तथ्यजानकारी
कार्यशाला‘कहानीकार’
स्थानरायपुर, छत्तीसगढ़
अवधि6–7 अक्टूबर 2026
मुख्य विषयकहानी, कला, पर्यावरण एवं जलवायु शिक्षा
थीमArt as Story, Story as Knowledge, Knowledge as Action
प्रमुख संस्थाएंIISER Pune CARE Project, समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, UNICEF, छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर
टैब्लॉइड‘जुगनू’
भाषाहिंदी एवं अंग्रेजी
प्रमुख अवधारणाEco-anxiety से Eco-agency
संबंधित क्षेत्रClimate Education, Environmental Health, Experiential Learning

समाचार विश्लेषण: पहल की वास्तविक उपयोगिता क्या है?

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल तापमान बढ़ने तक सीमित नहीं है। अत्यधिक गर्मी, अनियमित वर्षा, बाढ़, सूखा, जल-संकट, कृषि पर प्रभाव और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम जैसी समस्याएं बच्चों के भविष्य से भी सीधे जुड़ी हैं।

ऐसे में स्कूलों को केवल जलवायु परिवर्तन की परिभाषा पढ़ाने के बजाय बच्चों को स्थानीय पर्यावरणीय समस्याओं से जोड़ना अधिक प्रभावी हो सकता है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में जंगल, जैव-विविधता, कृषि, जल संसाधन और आदिवासी समुदायों का स्थानीय ज्ञान इस तरह की शिक्षा को और अधिक प्रासंगिक बना सकता है।

आगे की राह: ‘कहानीकार’ से कक्षा-कक्ष तक :

इस पहल की सफलता केवल दो दिवसीय कार्यशाला या ‘जुगनू’ के विमोचन से तय नहीं होगी। इसका वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देगा जब कार्यशाला में सीखी गई तकनीकों को नियमित कक्षा-अध्यापन में इस्तेमाल किया जाए। इसके लिए प्रत्येक स्कूल में स्थानीय Climate Action Projects, जल संरक्षण गतिविधियां, स्कूल परिसर में जैव-विविधता अवलोकन, स्थानीय मौसम डायरी, कचरा प्रबंधन और विद्यार्थियों की पर्यावरणीय कहानियों जैसे कार्यक्रम विकसित किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष :

रायपुर में आयोजित ‘कहानीकार’ कार्यशाला जलवायु शिक्षा को कहानी, कला और स्थानीय अनुभवों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग है। ‘जुगनू’ जैसे मंच बच्चों को केवल पर्यावरण के बारे में पढ़ने वाला विद्यार्थी नहीं, बल्कि प्रश्न पूछने, अपनी बात कहने और समाधान खोजने वाला सक्रिय नागरिक बनाने की दिशा में उपयोगी माध्यम बन सकते हैं।

छत्तीसगढ़ में IISER Pune, CARE Project, समग्र शिक्षा और UNICEF के बीच चल रही ऐसी गतिविधियां आने वाले समय में स्कूल शिक्षा को जलवायु जोखिमों के प्रति अधिक जागरूक, अनुभवात्मक और कार्रवाई-उन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

स्रोत-संदर्भ:

1.IISER Pune की आधिकारिक वेबसाइट CARE Project

2.छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग पोर्टल

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बस्तर दशहरा 2026 में मुरिया दरबार, जनजातीय संस्कृति और बस्तर विकास के संदेश के साथ

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर दशहरा 2026 में की जनजातीय संस्कृति की सराहना, मुरिया दरबार को बताया लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक :

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का रायपुर दौरा 2026, नुआखाई महोत्सव और युवा प्रबोधन कार्यक्रम

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का रायपुर दौरा 2026: नुआखाई महोत्सव, युवा प्रबोधन और विकसित भारत 2047 का संदेश :

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित ऐतिहासिक सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर

सिरपुर को UNESCO की अस्थायी विश्व धरोहर सूची में जगह, छत्तीसगढ़ की प्राचीन नगरी को मिली वैश्विक पहचान

कोंडागांव के बानू राम बैद को शिल्प गुरु अवार्ड 2025 के लिए चुना गया

कोंडागांव के बानू राम बैद को शिल्प गुरु अवार्ड 2025 के लिए चुना गया, बस्तर की ढोकरा कला को राष्ट्रीय पहचान :

सुकमा कनेक्ट 2.0 परियोजना को 1.17 करोड़ रुपये की मंजूरी, 24 घंटे बहुभाषी कॉल सेंटर और मोबाइल सेवा वैन से दूरस्थ गांवों तक नागरिक सेवाएं

सुकमा कनेक्ट 2.0 को मिला राष्ट्रीय पहचान:

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना 2026-27, आवेदन की अंतिम तिथि 30 अक्टूबर और IIT AIIMS IIM में प्रवेश लेने वाले पात्र विद्यार्थियों के लिए जानकारी

छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति 2026-27: 30 अक्टूबर तक करें आवेदन, जानें पात्रता और नियम :

Leave a Comment