छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पहली बार राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की ओर से 8 और 9 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के वरिष्ठ अधिकारी सहकारिता क्षेत्र के विस्तार, डिजिटल सेवाओं, ग्रामीण बैंकिंग, भंडारण और किसानों को बाजार से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन करेंगे।
सम्मेलन का केंद्रीय विषय ‘सहकार से समृद्धि’ है। इसका उद्देश्य प्राथमिक स्तर की सहकारी समितियों को केवल ऋण या कृषि इनपुट उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं तक सीमित न रखते हुए उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बहुउद्देशीय सेवा केंद्रों के रूप में विकसित करना है।
8 और 9 अक्टूबर को क्या होगा?
सम्मेलन की अध्यक्षता भारत सरकार के सहकारिता विभाग के सचिव आशीष कुमार भूटानी करेंगे। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) के अतिरिक्त सचिव एवं प्रबंध संचालक पंकज बंसल तथा भारत सरकार के अतिरिक्त सचिव सिद्धार्थ जैन सहित वरिष्ठ अधिकारी इसमें भाग लेंगे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 15 राज्यों के सहकारिता सचिव और 14 राज्यों के सहकारी समितियों के पंजीयक भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
सम्मेलन में इन मुद्दों पर रहेगा फोकस :
- नए मल्टीपर्पस प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (M-PACS) का गठन
- दुग्ध एवं मत्स्य सहकारी समितियों का विस्तार
- PACS/M-PACS का कंप्यूटरीकरण
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का विस्तार
- सहकारी बैंकिंग को मजबूत करना
- PACS के माध्यम से उर्वरक एवं कृषि आदानों की उपलब्धता
- ग्रामीण भंडारण क्षमता बढ़ाना
- राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं से प्राथमिक समितियों को जोड़ना
- सफल सहकारी मॉडलों को दूसरे राज्यों में लागू करना
छत्तीसगढ़ में 515 नए मल्टीपर्पस प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (M-PACS) का गठन :
सम्मेलन में छत्तीसगढ़ अपने सहकारी मॉडल और अब तक की उपलब्धियों को भी सामने रखेगा। राज्य सहकारिता विभाग के अनुसार ‘सहकार से समृद्धि’ के तहत प्रदेश में 515 नए M-PACS, 356 मत्स्य, 364 दुग्ध, 153 लघु वनोपज और 63 महिला बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन किया गया है। इसके अलावा ‘सहकारिताओं में सहकार’ अभियान के तहत जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में 3.18 लाख नए किसानों के खाते खोले गए हैं।
2,058 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों ( PACS ) बने प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र :
छत्तीसगढ़ में PACS को केवल कृषि ऋण देने वाली संस्थाओं के बजाय ग्रामीण स्तर पर बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम हुआ है। राज्य सहकारिता विभाग के अनुसार प्रदेश के सभी 2,058 PACS में प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (PMKSK) स्थापित किए जा चुके हैं। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को कृषि आदानों और सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य है।
भंडारण क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर :
किसानों के लिए उत्पादन के साथ-साथ भंडारण क्षमता भी महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ में PACS स्तर पर गोदाम निर्माण इसी दिशा में एक प्रमुख पहल है। राज्य में 200 मीट्रिक टन क्षमता वाले 725 गोदामों को विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है। इस योजना में केवल गोदाम ही नहीं, बल्कि खरीद केंद्र, कस्टम हायरिंग सेंटर, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्र और ग्रामीण हाट जैसी सुविधाओं के विकास की भी परिकल्पना है।
राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं से जुड़ रहे, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (M-PACS) :
छत्तीसगढ़ की प्राथमिक सहकारी समितियों को राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाओं से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रीय सहकारी निर्यात समिति, राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति और भारतीय बीज सहकारी समिति जैसे संस्थानों से जुड़ाव किसानों और सहकारी समितियों के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत सरकार के अनुसार इन राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के उत्पादों के निर्यात, जैविक उत्पादों के विपणन तथा गुणवत्तापूर्ण बीजों के उत्पादन और वितरण को मजबूत करना है।
एथेनॉल प्लांट से कृषि उपज का मूल्य संवर्धन :
छत्तीसगढ़ में सहकारी क्षेत्र को कृषि प्रसंस्करण और एथेनॉल उत्पादन से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। राज्य के भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने में 80 KLPD क्षमता का एथेनॉल संयंत्र स्थापित किया गया है। वहीं कोंडागांव में मक्का आधारित 80 KLPD एथेनॉल संयंत्र से स्थानीय कृषि उपज के मूल्य संवर्धन और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
याद रखें :
| तथ्य | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| सम्मेलन | राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन |
| स्थान | जगदलपुर, बस्तर |
| तारीख | 8-9 अक्टूबर 2026 |
| प्रमुख थीम | सहकार से समृद्धि |
| राज्य | छत्तीसगढ़ |
| नए M-PACS | 515 |
| नए मत्स्य सहकारी | 356 |
| नए दुग्ध सहकारी | 364 |
| लघु वनोपज समितियां | 153 |
| महिला बहुउद्देशीय समितियां | 63 |
| कुल PACS | 2,058 |
| PACS माइक्रो एटीएम लेनदेन | ₹324 करोड़ से अधिक |
| 200 MT क्षमता वाले गोदाम | 725 |
समाचार विश्लेषण: बस्तर के लिए इसका क्या महत्व?
बस्तर में इस सम्मेलन का महत्व केवल राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों के आगमन तक सीमित नहीं है। इसका सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि जनजातीय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहकारी मॉडल से जोड़ने के स्थानीय अनुभवों को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का अवसर मिलेगा। बस्तर में लघु वनोपज, कृषि, मत्स्य, डेयरी और ग्रामीण रोजगार की बड़ी संभावनाएं हैं। यदि सहकारी समितियों को डिजिटल बैंकिंग, भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार से प्रभावी रूप से जोड़ा जाता है, तो स्थानीय उत्पादों का मूल्यवर्धन बढ़ सकता है।
आगे की राह :
आने वाले समय में सफलता का आकलन केवल नई समितियां बनाने की संख्या से नहीं, बल्कि उनकी वित्तीय व्यवहार्यता, सदस्य सक्रियता, डिजिटल लेनदेन, बाजार संपर्क, भंडारण उपयोग और किसानों की वास्तविक आय पर प्रभाव से होना चाहिए। जगदलपुर सम्मेलन से यदि अगले तीन महीनों की स्पष्ट कार्ययोजना और आगामी वर्षों के लिए राज्यवार लक्ष्य निकलते हैं, तो सहकारिता को ग्रामीण आर्थिक विकास के अधिक प्रभावी माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया जा सकता है।
निष्कर्ष:
जगदलपुर में होने वाला राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन छत्तीसगढ़ के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें राज्य अपने M-PACS, डिजिटल बैंकिंग, भंडारण, लघु वनोपज और कृषि-आधारित सहकारी मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगा। वहीं CGPSC अभ्यर्थियों के लिए यह घटना ‘सहकार से समृद्धि’, PACS कंप्यूटरीकरण, विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण और छत्तीसगढ़ की सहकारी अर्थव्यवस्था से जुड़े कई संभावित प्रश्नों का आधार बन सकती है।
मुख्य स्रोत: छत्तीसगढ़ सहकारिता विभाग और भारत सरकार का सहकारिता मंत्रालय










