छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनके छोटे कारोबार को सफल उद्यम में बदलने के उद्देश्य से ‘अथ उद्यम’ पहल शुरू की गई है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ और भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) रायपुर के फाउंडेशन फॉर एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (FED) की संयुक्त पहल के माध्यम से महिला उद्यमियों को व्यवसाय विस्तार, प्रबंधन, ब्रांडिंग और बाजार से जुड़ने में सहायता मिलेगी।
इस कार्यक्रम के पहले चरण में 250 महिला उद्यमियों का चयन किया जाएगा। चयनित महिलाओं को 64 घंटे का विशेष व्यवसाय विकास प्रशिक्षण और एक वर्ष तक विशेषज्ञों का मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।
क्या है ‘अथ उद्यम’ पहल?
‘अथ उद्यम’ का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आजीविका अर्जित करने से आगे बढ़ाकर सक्षम व्यवसाय संचालक बनाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद निर्माण और अन्य छोटे व्यवसायों से जुड़ी हैं। लेकिन व्यवसाय को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए उन्हें वित्तीय प्रबंधन, उत्पाद की गुणवत्ता, विपणन, पैकेजिंग और ग्राहकों तक पहुंच जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता इस पहल के अंतर्गत महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण के साथ लंबे समय तक विशेषज्ञों की सहायता उपलब्ध कराने की योजना है।
इस कार्यक्रम की शुरुआत 11 सितंबर 2026 को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किए जाने की जानकारी समाचार रिपोर्टों में दी गई है। पहल का मूल विचार है—‘आजीविका से उद्यमिता की ओर’।
250 महिलाओं को मिलेगा प्रशिक्षण और एक साल तक मार्गदर्शन :
‘अथ उद्यम’ कार्यक्रम के तहत चयनित महिला उद्यमियों को निम्नलिखित सहायता दी जाएगी:
- 64 घंटे का प्रशिक्षण: व्यवसाय को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने और उसका विस्तार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण।
- एक वर्ष की मेंटरशिप: विशेषज्ञों से परामर्श, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग।
- वित्तीय प्रबंधन: लागत, बिक्री, खर्च और मुनाफे का हिसाब रखने की समझ विकसित करना।
- ब्रांडिंग और पैकेजिंग: उत्पादों को बेहतर पहचान देने और बाजार के अनुरूप तैयार करने की जानकारी।
- बाजार से जुड़ाव: ग्राहकों की मांग समझने, बिक्री बढ़ाने और नए बाजारों तक पहुंचने में सहायता।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को केवल कारोबार चलाने की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें व्यावसायिक निर्णय लेने, उत्पादन की योजना बनाने और अपने उद्यम की दीर्घकालीन वृद्धि पर काम करने के लिए सक्षम बनाना है।
किन महिलाओं को मिलेगा अवसर?
यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए उपयोगी है, जो पहले से व्यवसाय चला रही हैं और उसे आगे बढ़ाना चाहती हैं। स्वयं सहायता समूहों की सदस्य अथवा उनसे जुड़े परिवारों की महिला उद्यमी आवेदन कर सकती हैं। कार्यक्रम में गैर-कृषि आधारित उद्यमों को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान है।
इन क्षेत्रों से जुड़ी महिलाएं इस पहल के लिए अपनी पात्रता की जांच कर सकती हैं:
- खाद्य प्रसंस्करण एवं स्थानीय खाद्य उत्पाद।
- सिलाई, वस्त्र निर्माण और हस्तशिल्प।
- हथकरघा तथा पारंपरिक उत्पाद।
- वनोपज का मूल्य संवर्धन।
- स्थानीय उत्पादों का निर्माण और पैकेजिंग।
- गैर-कृषि सेवा आधारित व्यवसाय।
महत्वपूर्ण: केवल सामान खरीदकर बेचने वाले सामान्य ट्रेडिंग व्यवसायों को पात्र नहीं बताया गया है। अंतिम पात्रता और चयन की शर्तों के लिए आधिकारिक पोर्टल पर
अथ उद्यम के लिए आवेदन कैसे करें?
इच्छुक महिलाओं को आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी ।
आवेदन संबंधी प्रमुख जानकारी
| विवरण | जानकारी |
| कार्यक्रम का नाम | अथ उद्यम |
| प्रमुख संस्थान | IIM रायपुर और बिहान |
| प्रथम चरण में चयन | 250 महिला उद्यमी |
| प्रशिक्षण अवधि | 64 घंटे |
| विशेषज्ञ मार्गदर्शन | एक वर्ष |
| आवेदन की अंतिम तिथि | 31 अक्टूबर 2026 |
| आधिकारिक पोर्टल | atha.iimraipur.edu.in |
जिन महिलाओं को ऑनलाइन आवेदन करने में कठिनाई होती है, वे अपने स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन, क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF), क्षेत्रीय सीआरपी दीदी या विकासखंड स्तरीय बिहान कार्यालय से जानकारी और सहयोग प्राप्त कर सकती हैं।
ग्रामीण महिलाओं तक योजना पहुंचाने की तैयारी :
कार्यक्रम की जानकारी अधिक से अधिक ग्रामीण महिला उद्यमियों तक पहुंचाने के लिए IIM रायपुर द्वारा 252 क्लस्टर लेवल फेडरेशन सदस्यों को प्रशिक्षित किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अतिरिक्त जिला एवं विकासखंड स्तर के परियोजना प्रबंधकों को भी प्रशिक्षण दिया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य पात्र महिलाओं की पहचान करना, उन्हें आवेदन की जानकारी देना और ग्रामीण स्तर पर कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार को मजबूत बनाना है। इससे उन महिला उद्यमियों तक भी पहुंचने में मदद मिल सकती है, जिन्हें उच्च स्तरीय व्यावसायिक प्रशिक्षण या विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेने के अवसर सीमित रूप से मिलते हैं।
समाचार विश्लेषण:
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूह स्थानीय आजीविका और सामुदायिक आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। कई छोटे कारोबार गुणवत्ता, पैकेजिंग, बाजार की जानकारी, पूंजी प्रबंधन और बिक्री के सीमित साधनों के कारण विस्तार नहीं कर पाते। ऐसे में ‘अथ उद्यम’ जैसी पहल प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के जरिए इन बाधाओं को दूर करने का प्रयास कर सकती है।
इस पहल के तीन संभावित लाभ हैं:
- महिला सशक्तीकरण: महिलाओं की व्यावसायिक निर्णय लेने की क्षमता और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा मिल सकता है।
- ग्रामीण रोजगार: मौजूदा व्यवसायों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
- स्थानीय उत्पादों को बाजार: बेहतर ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन से छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों की पहुंच नए ग्राहकों तक बढ़ सकती है।
आगे की राह: प्रशिक्षण से कारोबार की सफलता तक
कार्यक्रम को अधिक प्रभावी बनाने के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण के बाद भी बाजार संबंधी सलाह, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, गुणवत्ता मानकों और वित्तीय संस्थानों से जुड़ने में व्यावहारिक सहयोग मिलना चाहिए। स्थानीय उत्पादों के लिए साझा ब्रांडिंग, प्रदर्शनियों और खरीदारों से संपर्क की व्यवस्था भी उपयोगी हो सकती है।
निष्कर्ष:
‘अथ उद्यम’ छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं को आजीविका से आगे बढ़ाकर सफल उद्यमी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यदि प्रशिक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ाव प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो यह ग्रामीण महिला उद्यमिता और स्थानीय आर्थिक विकास को प्रोत्साहित कर सकती है।
स्त्रोत : छ.ग. जनसंपर्क विभाग
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