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कृषक उन्नति योजना 2026: धान के बदले दूसरी फसल लगाने पर ₹15,000 प्रति एकड़, 31 अक्टूबर तक पंजीयन :

छत्तीसगढ़ कृषक उन्नति योजना 2026 के तहत पात्र किसानों को ₹15,000 प्रति एकड़ तक सहायता मिलेगी। 31 अक्टूबर तक पंजीयन, पात्रता और आवेदन प्रक्रिया जानें।

छत्तीसगढ़ कृषक उन्नति योजना 2026 में धान के बदले दूसरी फसल लगाने पर किसानों को मिलने वाली सहायता राशि
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HIGHLIGHTS

5 Key Highlights

  1. धान के बदले दूसरी खरीफ फसल लगाने वाले पात्र किसानों को ₹15,000 प्रति एकड़ तक सहायता।
  2. निर्धारित दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की खेती पर ₹10,000 प्रति एकड़ सहायता का प्रावधान।
  3. पंजीयन, फसल सुधार और कैरीफॉरवर्ड की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026।
  4. एकीकृत किसान पोर्टल और एग्रीस्टैक पंजीयन से संबंधित शर्तें लागू।
  5. पात्रता और सत्यापन के बाद DBT के माध्यम से बैंक खाते में सहायता राशि।

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए कृषक उन्नति योजना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार खरीफ वर्ष 2026 में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए पात्र किसानों को प्रति एकड़ ₹10,000 से ₹15,000 तक आदान सहायता देने का प्रावधान कर रही है। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन, फसल सुधार अथवा कैरीफॉरवर्ड की प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2026 तक पूरी करनी होगी। कृषि विभाग के अनुसार, किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन भी अनिवार्य है।

कृषक उन्नति योजना 2026: मुख्य हाइलाइट्स :

  • योजना का नाम: कृषक उन्नति योजना
  • लागू कृषि वर्ष: खरीफ 2026
  • अधिकतम सहायता: ₹15,000 प्रति एकड़
  • अन्य निर्धारित फसलों के लिए सहायता: ₹10,000 प्रति एकड़
  • पंजीयन की अंतिम तिथि: 31 अक्टूबर 2026
  • पंजीयन का माध्यम: एकीकृत किसान पोर्टल एवं संबंधित सेवा सहकारी समिति
  • अनिवार्य प्रक्रिया: एग्रीस्टैक पंजीयन तथा पात्रता के अनुसार फसल और रकबे का सत्यापन

धान के बदले दूसरी फसल लगाने पर कितनी मिलेगी सहायता?

कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत सहायता राशि फसल श्रेणी और निर्धारित पात्रता के आधार पर दी जाएगी।

किसान की श्रेणीनिर्धारित सहायता राशि
1.पिछले खरीफ सीजन में सेवा सहकारी समिति के माध्यम से MSP पर धान बेचने वाले पात्र किसान, जो खरीफ 2026 में धान के स्थान पर दूसरी खरीफ फसल अपनाते हैं₹15,000 प्रति एकड़
2.खरीफ में निर्धारित दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की खेती करने वाले अन्य पात्र किसान₹10,000 प्रति एकड़

यह राशि आदान सहायता के रूप में निर्धारित है। भुगतान के लिए संबंधित किसान का पंजीयन, पात्रता और फसल के रकबे का सत्यापन लागू नियमों के अनुसार किया जाएगा। इसलिए केवल दूसरी फसल बोने से सहायता मिलने की गारंटी नहीं है।

ध्यान दें: ₹15,000 प्रति एकड़ वाली श्रेणी में पिछले खरीफ सीजन में MSP पर धान बेचने की शर्त महत्वपूर्ण है। किसानों को अपनी पात्रता की पुष्टि कृषि विभाग अथवा सेवा सहकारी समिति से करनी चाहिए।

किन फसलों पर मिलेगा योजना का लाभ?

योजना का प्रमुख उद्देश्य किसानों को धान के अतिरिक्त अन्य फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। निर्धारित फसलों में शामिल हैं:

  • दलहन: अरहर तथा अन्य पात्र दलहन फसलें।
  • तिलहन: सोयाबीन, मूंगफली तथा अन्य पात्र तिलहन फसलें।
  • मक्का: खरीफ मौसम में मक्का की खेती।
  • लघु धान्य: कोदो, कुटकी और रागी।
  • कपास: योजना के प्रावधानों के अंतर्गत कपास की खेती।

कृषक उन्नति योजना के लिए पंजीयन कैसे कराएं?

किसान निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर सकते हैं:

चरण 1: अपने क्षेत्र की निकटतम सेवा सहकारी समिति में संपर्क करें।

चरण 2: एकीकृत किसान पोर्टल पर अपने किसान पंजीयन की स्थिति जांचें।

चरण 3: आवश्यकता के अनुसार नया पंजीयन, फसल सुधार या कैरीफॉरवर्ड की प्रक्रिया पूरी कराएं।

चरण 4: एग्रीस्टैक पोर्टल पर अपना पंजीयन सुनिश्चित करें।

चरण 5: भूमि, फसल और बोए गए रकबे से संबंधित विवरण सही रखें। जहां लागू हो, डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से रकबे का सत्यापन कराएं।

चरण 6: पंजीयन और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं 31 अक्टूबर 2026 से पहले पूरी कर लें।

पंजीयन की प्रक्रिया तथा पात्रता से संबंधित जानकारी के लिए किसान ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या संबंधित कृषि विभाग कार्यालय से भी संपर्क कर सकते हैं।

कृषक उन्नति योजना क्यों महत्वपूर्ण है?

छत्तीसगढ़ में धान प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है। हालांकि, लगातार एक ही फसल पर निर्भरता, खेती की बढ़ती लागत, पानी की उपलब्धता और बाजार में कीमतों का उतार-चढ़ाव किसानों के सामने चुनौतियां पैदा कर सकते हैं।

फसल विविधीकरण के माध्यम से किसान अपनी कृषि व्यवस्था में दूसरी फसलों को शामिल कर सकते हैं। दलहन और तिलहन का उत्पादन बढ़ने से खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के साथ-साथ घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहन मिल सकता है। वहीं, मक्का और लघु धान्य जैसी फसलें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराती हैं।

निष्कर्ष एवं आगे की राह :

कृषक उन्नति योजना का उद्देश्य किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित करना और खेती में विविधता बढ़ाना है। पात्र किसानों के लिए समय पर पंजीयन और सही फसल विवरण महत्वपूर्ण हैं। दूसरी ओर, योजना की दीर्घकालिक सफलता के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज, सिंचाई, फसल बीमा, भंडारण, प्रसंस्करण और वैकल्पिक फसलों के लिए भरोसेमंद बाजार भी आवश्यक हैं।

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