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छत्तीसगढ़ में वसुंधरा परियोजना से राजस्व अभिलेखों का होगा डिजिटलीकरण, जानिए क्या बदलेगा :

वसुंधरा परियोजना के तहत छत्तीसगढ़ में पुराने राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण होगा। जानिए परियोजना का उद्देश्य, AI-OCR तकनीक, सेवा सेतु से जुड़ाव और महत्वपूर्ण तथ्य।

छत्तीसगढ़ वसुंधरा परियोजना के तहत राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण
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HIGHLIGHTS

5 Key Highlights:
1. वसुंधरा परियोजना के तहत राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण
2. पुराने एवं ऐतिहासिक भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल संरक्षण
3. AI और OCR से रिकॉर्ड की खोज होगी आसान
4. सेवा सेतु से डिजिटल राजस्व सेवाओं को जोड़ने की दिशा में पहल
5. CGPSC और CGSSB के लिए महत्वपूर्ण ई-गवर्नेंस एवं राजस्व सुधार

छत्तीसगढ़ में राजस्व सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में वसुंधरा’ परियोजना (VASUNDHARA) महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आई है। परियोजना के तहत जिला और तहसील स्तर पर सुरक्षित पुराने एवं वर्तमान राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण, संरक्षण और प्रमाणीकरण किया जाएगा।

इसका उद्देश्य केवल पुराने दस्तावेजों को स्कैन करके कंप्यूटर में सुरक्षित करना नहीं है, बल्कि राजस्व अभिलेखों का एकीकृत डिजिटल अभिलेखागार तैयार करना और नागरिकों को प्रमाणित दस्तावेज ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित करना है। जुलाई 2026 की समीक्षा में भी सभी जिला एवं तहसील कार्यालयों के महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों को एकीकृत डिजिटल अभिलेखागार से जोड़ने तथा नकल शाखाओं को ऑनलाइन करने पर जोर दिया गया था।

क्या है वसुंधरा परियोजना?

VASUNDHARA का विस्तृत रूप Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives है। सरल शब्दों में इसका उद्देश्य छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण वर्तमान एवं ऐतिहासिक भूमि-राजस्व अभिलेखों को डिजिटल, सुरक्षित, प्रमाणित और आसानी से खोजे जा सकने योग्य बनाना है।

यह पहल राज्य में पहले से संचालित भुइयाँ और भू-नक्शा जैसी डिजिटल भूमि रिकॉर्ड व्यवस्थाओं को ऐतिहासिक और भौतिक रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण से और मजबूत करने की दिशा में देखी जा सकती है। छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार भुइयाँ के माध्यम से खसरा, बी-1 आदि भूमि संबंधी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध है तथा डिजिटल हस्ताक्षरित दस्तावेज प्राप्त किए जा सकते हैं।

किन राजस्व अभिलेखों को डिजिटल किया जाएगा?

वसुंधरा परियोजना के तहत पुराने और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को स्कैन करके डिजिटल रूप में संरक्षित करने की योजना है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • अधिकार अभिलेख पंजी
  • बंदोबस्त एवं चकबंदी मिसल
  • निस्तार पत्रक
  • खसरा अभिलेख
  • राजस्व न्यायालय के आदेश
  • मूल ग्राम नक्शे
  • संशोधन पंजी
  • वर्ष 2020 से पूर्व के खसरा पंचशाला अभिलेख
  • किश्तबंदी खतौनी
  • अन्य महत्वपूर्ण ऐतिहासिक राजस्व अभिलेख

इस प्रकार परियोजना का महत्व केवल वर्तमान भूमि रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि पुराने अभिलेखों के संरक्षण से भविष्य में भूमि स्वामित्व, नामांतरण, सीमांकन और राजस्व विवादों से जुड़े मामलों में रिकॉर्ड उपलब्धता बेहतर हो सकती है।

रिकॉर्ड रूम का भी होगा आधुनिकीकरण :

परियोजना में केवल दस्तावेजों की स्कैनिंग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिला और तहसील स्तर के राजस्व रिकॉर्ड रूम को आधुनिक बनाने की भी योजना है। भौतिक दस्तावेजों को व्यवस्थित तरीके से वर्गीकृत करने के लिए बारकोड आधारित व्यवस्था और डिजिटल लोकेशन प्रणाली का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे किसी पुराने दस्तावेज को भौतिक रिकॉर्ड रूम में ढूंढने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिलेगी।

AI और OCR तकनीक से पुराने रिकॉर्ड ढूंढना होगा आसान :

वसुंधरा परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी शामिल है। पुराने राजस्व दस्तावेजों में बड़ी संख्या में हस्तलिखित और पुराने प्रारूप में तैयार रिकॉर्ड मौजूद हैं। इन्हें डिजिटल बनाने के लिए OCR (Optical Character Recognition) तकनीक का इस्तेमाल प्रस्तावित है।

AI आधारित खोज और दस्तावेज वर्गीकरण जैसी तकनीकों के माध्यम से पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल डेटाबेस में खोजने की क्षमता विकसित की जा सकती है। इसका संभावित लाभ यह होगा कि किसी दस्तावेज की जानकारी खोजने के लिए कर्मचारी को बार-बार पुराने रजिस्टर और फाइलें देखने की आवश्यकता कम होगी।

सेवा सेतु से जुड़ेंगे डिजिटल राजस्व रिकॉर्ड :

वसुंधरा परियोजना के डिजिटल रिकॉर्ड को सेवा सेतु जैसे नागरिक सेवा मंच से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। सेवा सेतु छत्तीसगढ़ शासन का नागरिक-केंद्रित डिजिटल मंच है, जिसके माध्यम से नागरिक विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन और आवेदन की स्थिति की निगरानी कर सकते हैं। पोर्टल पर डिजिटल प्रमाणपत्र और QR आधारित सत्यापन जैसी सुविधाओं का भी प्रावधान है।

राजस्व रिकॉर्ड इससे प्रभावी रूप से जुड़ने पर भविष्य में नागरिकों के लिए—

  • ऑनलाइन आवेदन
  • शुल्क भुगतान
  • प्रमाणित डिजिटल प्रतियां प्राप्त करना
  • आवेदन की स्थिति देखना
  • डिजिटल दस्तावेज का सत्यापन

जैसी सुविधाएं अधिक सुगम हो सकती हैं।

भुइयाँ पोर्टल से कैसे अलग है वसुंधरा?

भुइयाँ मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ के डिजिटल भूमि अभिलेखों के संधारण और नागरिकों को भूमि संबंधी वर्तमान जानकारी उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था है। आधिकारिक भुइयाँ पोर्टल पर खसरा विवरण, बी-1/पी-II, नामांतरण की स्थिति, नामांतरण पंजी और अन्य सेवाएं उपलब्ध हैं। वहीं वसुंधरा परियोजना का प्रमुख फोकस पुराने एवं महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों के डिजिटलीकरण, संरक्षण, प्रमाणीकरण और एकीकृत डिजिटल अभिलेखागार के निर्माण पर है।

किसानों और जमीन मालिकों को क्या फायदा होगा?

परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से आम नागरिकों को कई स्तरों पर लाभ मिलने की संभावना है।

1. तहसील कार्यालय के चक्कर कम होंगे

पुराने दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां प्राप्त करने के लिए बार-बार रिकॉर्ड रूम जाने की आवश्यकता कम हो सकती है।

2. रिकॉर्ड प्राप्त करने में समय कम लगेगा

डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से दस्तावेजों की खोज और प्रतिलिपि तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

3. पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे

कागजी दस्तावेज समय के साथ खराब, फट या नष्ट हो सकते हैं। डिजिटल संरक्षण से ऐतिहासिक अभिलेखों की एक अतिरिक्त सुरक्षित प्रति उपलब्ध रहेगी।

4. पारदर्शिता बढ़ सकती है

डिजिटल रिकॉर्ड, डिजिटल हस्ताक्षर और सत्यापन जैसी व्यवस्थाएं रिकॉर्ड में अनधिकृत बदलाव की संभावना को कम करने में मदद कर सकती हैं।

5. राजस्व मामलों में रिकॉर्ड उपलब्धता बेहतर होगी

नामांतरण, सीमांकन, भूमि विवाद और अन्य राजस्व मामलों में पुराने दस्तावेज महत्वपूर्ण होते हैं। इनके व्यवस्थित डिजिटल संरक्षण से संबंधित रिकॉर्ड जल्दी उपलब्ध हो सकते हैं।

छत्तीसगढ़ में भूमि रिकॉर्ड का डिजिटल आधार पहले से मौजूद

राजस्व विभाग के भुइयाँ प्रोजेक्ट के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में उपलब्ध कराया जा रहा है। विभाग के अनुसार नागरिक भूस्वामी का नाम, जिला, तहसील, गांव और खसरा नंबर जैसी जानकारी के आधार पर भूमि संबंधी रिकॉर्ड खोज सकते हैं।

याद रखने योग्य तथ्य :

परियोजना: वसुंधरा

पूरा नाम: Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives

मुख्य विभाग: राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, छत्तीसगढ़

मुख्य उद्देश्य: राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण, संरक्षण, प्रमाणीकरण और एकीकृत डिजिटल अभिलेखागार

प्रमुख तकनीक: OCR, AI आधारित खोज, डिजिटल वर्गीकरण, बारकोड आदि

संबंधित डिजिटल मंच: भुइयाँ, भू-नक्शा और सेवा सेतु

मुख्य लाभार्थी: किसान, भू-स्वामी, आम नागरिक, राजस्व विभाग और न्यायिक/प्रशासनिक तंत्र

विश्लेषण :

वसुंधरा परियोजना को केवल तकनीकी परियोजना के रूप में नहीं देखना चाहिए। यह भूमि प्रशासन में ई-गवर्नेंस और सुशासन का उदाहरण है। भूमि रिकॉर्ड भारत में प्रशासनिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भूमि स्वामित्व, कृषि ऋण, नामांतरण, सीमांकन, भूमि हस्तांतरण और विभिन्न सरकारी योजनाओं में इन रिकॉर्ड की भूमिका रहती है।

इसलिए पुराने रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण प्रशासन को अधिक डेटा-आधारित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, केवल स्कैनिंग पर्याप्त नहीं होगी। पुराने रिकॉर्ड की गुणवत्ता, OCR की शुद्धता, नाम एवं खसरा विवरण की डेटा एंट्री, रिकॉर्ड का सत्यापन, साइबर सुरक्षा और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच जैसी चुनौतियों पर भी ध्यान देना आवश्यक होगा।

आगे की राह क्या होनी चाहिए?

वसुंधरा परियोजना की सफलता के लिए निम्न बिंदु महत्वपूर्ण रहेंगे—

1.पुराने रिकॉर्ड की केवल स्कैनिंग के बजाय उनकी गुणवत्ता जांच और प्रमाणीकरण सुनिश्चित किया जाए।

2.OCR और AI से प्राप्त जानकारी को मूल दस्तावेज से सत्यापित करने की व्यवस्था हो।

3.डिजिटल रिकॉर्ड की साइबर सुरक्षा और नियमित बैकअप को प्राथमिकता दी जाए।

4. ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की समस्या को दूर किया जाए।

5. भुइयाँ, भू-नक्शा, सेवा सेतु और अन्य राजस्व प्रणालियों के बीच बेहतर अंतर-संचालनीयता विकसित की जाए।

6.नागरिकों को डिजिटल रिकॉर्ड में त्रुटि मिलने पर सुधार के लिए सरल और समयबद्ध शिकायत व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

निष्कर्ष :

वसुंधरा परियोजना छत्तीसगढ़ में राजस्व अभिलेखों के संरक्षण और डिजिटल राजस्व प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसका वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देगा जब पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित डिजिटल रूप में उपलब्ध होने के साथ-साथ नागरिकों को प्रमाणित दस्तावेज आसानी से और कम समय में मिल सकें।

छत्तीसगढ़ पहले से ही भुइयाँ जैसे डिजिटल भूमि रिकॉर्ड प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन भूमि सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। वसुंधरा परियोजना, पुराने और ऐतिहासिक राजस्व अभिलेखों को डिजिटल अभिलेखागार में व्यवस्थित करके इस व्यवस्था को और व्यापक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

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